संकष्टी चतुर्थी 2026: सभी तारीख़ें
2026 में नई दिल्ली में 13 संकष्टी चतुर्थी हैं। अगली करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है।
संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि पर गणेश जी का व्रत है, जो चंद्रोदय पर खोला जाता है। इसकी तारीख़ वह दिन है जिस दिन चंद्रोदय पर चतुर्थी हो।
सकट चौथमंगलवार, 6 जनवरी 2026
कृष्ण चतुर्थी सुबह 8:02, 6 जन॰ से सुबह 6:52, 7 जन॰ तक · चंद्रोदय रात 8:54
संकष्टी चतुर्थीगुरुवार, 5 फ़रवरी 2026
कृष्ण चतुर्थी रात 12:10, 5 फ़र॰ से रात 12:22, 6 फ़र॰ तक · चंद्रोदय रात 9:34
संकष्टी चतुर्थीशुक्रवार, 6 मार्च 2026
कृष्ण चतुर्थी शाम 5:53, 6 मार्च से शाम 7:17, 7 मार्च तक · चंद्रोदय रात 9:13
संकष्टी चतुर्थीरविवार, 5 अप्रैल 2026
कृष्ण चतुर्थी दोपहर 12:00, 5 अप्रैल से दोपहर 2:10, 6 अप्रैल तक · चंद्रोदय रात 9:53
संकष्टी चतुर्थीमंगलवार, 5 मई 2026
कृष्ण चतुर्थी सुबह 5:24, 5 मई से सुबह 7:51, 6 मई तक · चंद्रोदय रात 10:30
संकष्टी चतुर्थीबुधवार, 3 जून 2026
कृष्ण चतुर्थी रात 9:21, 3 जून से रात 11:31, 4 जून तक · चंद्रोदय रात 9:59
संकष्टी चतुर्थीशुक्रवार, 3 जुलाई 2026
कृष्ण चतुर्थी सुबह 11:20, 3 जुल॰ से दोपहर 12:40, 4 जुल॰ तक · चंद्रोदय रात 9:48
संकष्टी चतुर्थीरविवार, 2 अगस्त 2026
कृष्ण चतुर्थी रात 11:07, 1 अग॰ से रात 11:15, 2 अग॰ तक · चंद्रोदय रात 9:20
संकष्टी चतुर्थीसोमवार, 31 अगस्त 2026
कृष्ण चतुर्थी सुबह 8:51, 31 अग॰ से सुबह 7:42, 1 सित॰ तक · चंद्रोदय रात 8:25
संकष्टी चतुर्थीमंगलवार, 29 सितंबर 2026
कृष्ण चतुर्थी शाम 5:10, 29 सित॰ से दोपहर 2:55, 30 सित॰ तक · चंद्रोदय शाम 7:39
करवा चौथगुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
कृष्ण चतुर्थी रात 1:07, 29 अक्टू॰ से रात 10:10, 29 अक्टू॰ तक · चंद्रोदय रात 8:11
संकष्टी चतुर्थीशुक्रवार, 27 नवंबर 2026
कृष्ण चतुर्थी सुबह 9:48, 27 नव॰ से सुबह 6:40, 28 नव॰ तक · चंद्रोदय रात 8:12
संकष्टी चतुर्थीशनिवार, 26 दिसंबर 2026
कृष्ण चतुर्थी रात 8:05, 26 दिस॰ से शाम 5:13, 27 दिस॰ तक · चंद्रोदय रात 8:14
नई दिल्ली (28.61°, 77.21°) के लिए, भारतीय समय में, स्विस एफ़ेमेरिस से गणना: निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु के नियमों से, जैसे द्रिक पंचांग उन्हें लागू करता है, उत्तर भारतीय (पूर्णिमांत) पंचांग में। 2026 और 2027 की हमारी तारीख़ें द्रिक पंचांग की नई दिल्ली सूची से मेल खाती हैं। दूसरी जगह तारीख़ एक दिन आगे-पीछे हो सकती है, और परिवारों और क्षेत्रों की अपनी परंपराएँ होती हैं।
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